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चोपड़ा : घरेलू टीमों को अपनी मुफ़ीद पिचों की मांग करनी चाहिए और उन्हें यह मिलना भी चाहिए

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Chopra: Teams should dictate nature of pitches at home (9:28)

Are franchises well within their rights to ask for a certain type of pitch? Aakash Chopra and Sanjay Bangar weigh in (9:28)

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ आकाश चोपड़ा का मानना है कि IPL टीमों को अपनी घरेलू पिचों को तैयार करने में उनकी भूमिका होनी चाहिए।

ESPNcricinfo के IPL शो में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि हर घरेलू टीम को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वे किस तरह की पिच चाहते हैं। उन्हें अपनी मुफीद पिचों की मांग करनी चाहिए और उन्हें वह मिलनी भी चाहिए क्योंकि तभी आपको घरेलू फायदा मिल पाएगा।

"हालांकि आप गुवाहाटी या धर्मशाला में पिच कैसी होगी, इसके आधार पर टीम नहीं चुनते हैं। आप एक टीम इस आधार पर चुनते हैं, जो सवाई मानसिंह स्टेडियम [जयपुर] में सात मैच खेलने जा रही है या चेन्नई एक ऐसी टीम चुनेगी जो उन सात मैचों के लिए चेपॉक के लिए आदर्श हो।

"और यदि आप उन्हें उस सही तरह की टीम को खिलाने का अवसर देने से इनकार करते हैं, तो फिर यह फॉर्मूला बेकार हो जाएगा। इसलिए मेरी राय में हर टीम को वास्तव में यह तय करने की अनुमति होनी चाहिए कि घरेलू पिचें कैसे बनाई जानी चाहिए।"

बांगड़: आप नहीं चाहते कि खेल बहुत एकतरफ़ा हो

इसी शो में भारत के पूर्व ऑलराउंडर संजय बांगड़ ने एक अलग राय व्यक्त की। उनका मानना है कि IPL में पिचों को तैयार करने के लिए कुछ व्यापक दिशानिर्देश होने चाहिए, जिनका सभी क्यूरेटर्स को पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि BCCI अभी भी इस पर थोड़ा नियंत्रण रखना चाहेगा और एक विशेष पिच की विशेषताओं को बनाए रखना चाहेगा। यदि आप इसे पूरी तरह से फ़्रेंचाइज़ी के हाथों में दे देते हैं, तो फिर खेल बहुत एकतरफ़ा भी हो सकता है। इसलिए मैं यह राय देता हूं कि इसमें घरेलू टीम का बहुत अधिक कहना न हो, फिर भी वे थोड़ा सा मार्गदर्शन ज़रूर दे सकते हैं।"

बांगड़ ने कहा कि टीमों के लिए छोटे मैदानों, जैसे- बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में विभिन्न विशेषताओं वाली पिचें बनाना अधिक कठिन हो सकता है, जहां IPL मैचों के लिए केवल स्क्वायर की दो सबसे केंद्रीय पिचों का उपयोग किया जाता है। बड़े स्क्वायर बाउंड्री वाले मैदान अपने IPL मैच अधिक संख्या में पिचों पर खेल सकते हैं।

बांगड़ ने कहा, "चिन्नास्वामी में, केवल दो पिचें हैं, जिन पर आप खेल खेल सकते हैं क्योंकि मैदान का आकार ऐसा है। आम तौर पर, आप उन दो सतहों [के बीच] बहुत अधिक भिन्नता नहीं रख सकते हैं, क्योंकि ऐसा करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।"

इसे ध्यान में रखते हुए, बांगड़ ने महसूस किया कि टीमों के लिए घरेलू फ़ायदे का उपयोग करने का सबसे अच्छा तरीका है- रिटेंशन और नीलामी चरणों के दौरान अपनी टीम बनाते समय घरेलू परिस्थितियों के अपने ज्ञान का उपयोग करना।

उन्होंने कहा, "आप उस विशेष पिच के बारे में पिछले ज्ञान और पिछले अनुभव को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट रूप से एक टीम बना सकते हैं और एक बेहतर टीम चुन सकते हैं। लेकिन अगर आप एक टीम चुनते हैं और फिर ग्राउंड्समैन से [एक विशेष प्रकार की पिच] मांगते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि यह सिस्टम के साथ अच्छा होगा।"

'मैं आपसे बटर चिकन से चिकन हटाने के लिए नहीं कह रहा'

हालांकि चोपड़ा इससे इतर राय रखते हैं। उन्होंने कहा, "अंत में एक मैच रेफ़री होता है। अगर आपको लगता है कि कोई पिच क्रिकेट के लिए उपयुक्त नहीं है, तो मैच रेफ़री है, जो उस पर अपना निर्णय ले सकता है। आपके पास वास्तव में यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ होना चाहिए कि आप खेल की पवित्रता से समझौता नहीं कर रहे हैं। यदि ऐसा सुनिश्चित हो रहा है, तो फिर टीमों को पिच तैयार करने के लिए दिशानिर्देश देने की अनुमति होनी चाहिए।"

चोपड़ा ने कहा, "मैं आपसे बटर चिकन से चिकन हटाने के लिए नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं कि ठीक है, क्या हम इसे थोड़ा हल्का बना सकते हैं? क्या हम इसे थोड़ा कम तैलीय बना सकते हैं?"

वहीं बांगड़ ने कहा, "फ़्रेंचाइज़ी किसी स्टेडियम को एक विशेष शुल्क का भुगतान करती है। वे मैदान के मालिक नहीं हैं और ना ही वे क्यूरेटरों को भुगतान नहीं करते हैं। मुझे लगता है कि भविष्य में एक समय ऐसा भी आएगा, जब फ़्रेंचाइज़ी के अपने मैदान और ग्राउंडस्टाफ़ हो सकते हैं और फिर वे अपनी मुफ़ीद पिचें बना सकते हैं। फ़िलहाल वे किराए पर रह रहे हैं और जब आप किराए पर रहते हैं, तो आप पूरी तरह से बहुत सारे बदलाव नहीं कर सकते हैं।"